कतर से युवक का पार्थिव शरीर पहुंचा भारत, हजारों लोगों ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई

कतर से युवक का पार्थिव शरीर पहुंचा भारत, हजारों लोगों ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई

सूरत। कतर के एक गैस प्लांट में हुए भीषण हादसे में जान गंवाने वाले गुजरात के सूरत निवासी युवक का पार्थिव शरीर भारत पहुंचने के बाद उसके पैतृक गांव लाया गया, जहां परिवार और ग्रामीणों ने नम आंखों से उसे अंतिम विदाई दी। युवक की मौत की खबर मिलते ही पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग उसके घर पहुंचे और पूरे गांव में शोक का माहौल छा गया। हर किसी की आंखें नम थीं और लोग परिवार को ढांढस बंधाते नजर आए।

मृतक युवक कुछ माह पहले ही बेहतर भविष्य और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से रोजगार की तलाश में कतर गया था। परिजनों के अनुसार वह विदेश में नौकरी कर अपने माता-पिता, पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों का जीवन बेहतर बनाना चाहता था। किसी ने भी यह नहीं सोचा था कि जिस बेटे को बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ विदेश भेजा गया था, वह तिरंगे में लिपटकर वापस लौटेगा।

जानकारी के अनुसार कतर के गैस प्लांट में अचानक हुए विस्फोट में कई श्रमिक इसकी चपेट में आ गए। हादसा इतना भीषण था कि कई लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। इस दुर्घटना में गुजरात के सूरत निवासी युवक की भी जान चली गई। घटना की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और रिश्तेदारों तथा परिचितों का घर पर आना शुरू हो गया।

परिवार ने भारत सरकार और कतर स्थित भारतीय दूतावास से पार्थिव शरीर भारत लाने की मांग की। आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी किए जाने के बाद भारतीय दूतावास के सहयोग से युवक का पार्थिव शरीर हवाई मार्ग से अहमदाबाद लाया गया। इसके बाद एंबुलेंस के माध्यम से उसे उसके पैतृक गांव पहुंचाया गया। पार्थिव शरीर के गांव पहुंचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मां, पत्नी और अन्य परिजन अपने प्रियजन को अंतिम बार देखकर भावुक हो उठे। वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

अंतिम दर्शन के लिए गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। सामाजिक संगठनों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने भी परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। अंतिम यात्रा में हजारों लोगों की मौजूदगी ने यह दर्शाया कि युवक अपने मिलनसार व्यवहार और सरल स्वभाव के कारण समाज में काफी लोकप्रिय था। पूरे सम्मान के साथ उसकी अंतिम यात्रा निकाली गई और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया।

ग्रामीणों का कहना था कि विदेशों में काम करने वाले भारतीय श्रमिक अपने परिवारों के बेहतर भविष्य के लिए कठिन परिस्थितियों में कार्य करते हैं। ऐसे हादसे न केवल एक परिवार को तोड़ देते हैं, बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख देते हैं। लोगों ने मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता और हर संभव सरकारी सहयोग उपलब्ध कराने की मांग भी की।

इस दुखद घटना के बाद क्षेत्र में शोक की लहर है। स्थानीय लोगों ने सरकार से विदेशों में कार्यरत भारतीय श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को शीघ्र सहायता उपलब्ध कराने की अपील की है। परिजनों ने बताया कि युवक मेहनती और जिम्मेदार स्वभाव का था तथा अपने परिवार के सपनों को पूरा करने के लिए विदेश गया था। उसकी असमय मौत से परिवार के सामने भावनात्मक ही नहीं, आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है।

यह हादसा एक बार फिर उन हजारों भारतीय परिवारों की पीड़ा को सामने लाता है, जिनके सदस्य रोजगार की तलाश में विदेशों में कार्यरत हैं। बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर घर से निकले इस युवक की घर वापसी खुशी के बजाय गहरे मातम में बदल गई। अंतिम विदाई के दौरान मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं और पूरे गांव ने एकजुट होकर उसे श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रशासन ने भी परिवार को हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है, जबकि लोग इस घटना की निष्पक्ष जांच और भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

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