लॉरेंस का घर पूछा तो झिझका दुकानदार:बुजुर्ग बोले- 110 एकड़ जमीन, 3-4 कोठियां, लैंडलॉर्ड का बेटा; चंडीगढ़ जाकर गलत संगत में पड़ा

पंजाब के अबोहर का दुतारांवाली गांव। बाहर गांव का बोर्ड, अंदर जाती सड़क के दोनों तरफ खेत। कहीं बैलगाड़ी गुजर रही है, तो कहीं पेड़ के नीचे ताश खेलते बुजुर्ग। यही गैंगस्टर लॉरेंस का गांव है। लॉरेंस को गुजरात की साबरमती जेल में आज 3 साल पूरे हो गए हैं। अमेरिकी जांच एजेंसी FBI के ऑपरेशन हॉर्डबॉल में लॉरेंस पर जेल से नेटवर्क चलाने के आरोप के बाद दैनिक भास्कर उसके गांव दुतारांवाली पहुंचा। गांव में पहुंचते ही लॉरेंस का घर पूछा तो किराना दुकानदार थोड़ा झिझका, फिर रास्ता बता दिया। आगे मंदिर के पास मिले बुजुर्गों से बात हुई तो जुर्म की चर्चा से पहले लॉरेंस के बचपन की बातें सामने आईं- क्रिकेट, स्कूल और गांव का खेल का मैदान। ग्रामीणों के मुताबिक, लॉरेंस के परिवार के पास करीब 110 किले (एकड़) जमीन और 3-4 कोठियां हैं। एक ग्रामीण ने कहा, ‘उसे फिरौती मांगने की जरूरत नहीं थी।’ ग्रामीणों ने यह भी बताया कि आखिरी बार लॉरेंस को 10-12 साल पहले गांव में देखा गया था। तब से वह सिर्फ मीडिया में ही नजर आता है। वहीं, ग्राउंड में खेल रहे बच्चों ने लॉरेंस के बारे में कैमरे पर बात करने से इनकार कर दिया। घर पूछने पर दुकानदार झिझका, फिर मंदिर का रास्ता बताया
गांव में लॉरेंस का घर और उसके दादा की याद में बना मंदिर तलाशने के लिए टीम ने एक किराना की दुकान पर रुककर रास्ता पूछा। दुकानदार पहले थोड़ा झिझका, लेकिन बाद में मंदिर की तरफ जाने का रास्ता बता दिया। आगे बढ़ने पर मंदिर के पास पेड़ के नीचे कुछ बुजुर्ग ताश खेलते मिले। टीम ने अपना परिचय दिया तो उन्होंने बातचीत शुरू की। दादा की याद में मंदिर, यहीं मिले गांव के बुजुर्ग
दुतारांवाली में लॉरेंस के दादा की याद में मंदिर बना हुआ है। इसी मंदिर के पास मिले बुजुर्गों से बातचीत में लॉरेंस के बचपन की बातें सामने आईं। बुजुर्गों ने बताया कि बचपन में लॉरेंस खेलकूद में आगे रहता था। उसे क्रिकेट का शौक था। क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए घर से पैसे लाता था
गांव निवासी अशोक कुमार ने लॉरेंस के बचपन को याद करते हुए कहा कि वह खेलकूद में ज्यादा ध्यान देता था। अशोक के मुताबिक, लॉरेंस गांव में क्रिकेट टूर्नामेंट करवाने के लिए अपने घर से पैसे लगाता था। लॉरेंस हमारे गांव में बहुत अच्छा लड़का था। लॉरेंस नशे के खिलाफ रहता था और नशा करने वाले युवाओं को रोकता-समझाता था 5वीं तक साथ पढ़े, तब कोई गैंग या ग्रुप नहीं था
लॉरेंस के साथ पांचवीं कक्षा तक पढ़े दर्शी राज ने भी उसके बचपन की बातें बताईं। उन्होंने कहा कि उस समय लॉरेंस खेलकूद में रहता था और बच्चों को खिलवाने के लिए अपने घर से पैसे लगाता था। दर्शी राज ने बताया कि वह खुद मध्यम परिवार से हैं। उनके मुताबिक, लॉरेंस ने उन्हें भी अपनी तरफ से खिलवाने के लिए पैसे दिए थे। उन्होंने कहा कि लॉरेंस पढ़ाई में भी अच्छा था और स्कूल के शिक्षकों के साथ उसका रिश्ता पिता-बेटे जैसा था। बचपन में उसका कोई गैंग या ग्रुप नहीं था। वह खेल में ही रमा रहता था। परिवार के पास 110 किले जमीन, 3-4 कोठियां
बातचीत में लॉरेंस के परिवार की संपत्ति का भी जिक्र आया। ग्रामीणों के मुताबिक, परिवार के पास करीब 110 किले (एकड़) जमीन और 3-4 कोठियां हैं। उसके पिता खेती से जुड़े रहे हैं। गांव में रहने वाले कृष्ण कुमार ने कहा कि परिवार आर्थिक रूप से संपन्न है। जब परिवार के पास अपनी जमीन-जायदाद है तो लॉरेंस को किसी से रंगदारी मांगने की जरूरत नहीं थी। लोगों ने गांव में जरूरतमंद परिवारों की मदद और लड़कियों की शादी में पैसे देने की बात भी कही। कृष्ण कुमार बताते हैं कि लॉरेंस के परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी थी। परिवार के पास अपनी जमीन थी, इसलिए लॉरेंस को किसी से रंगदारी मांगने की जरूरत नहीं थी। कृष्ण कुमार के मुताबिक, लॉरेंस पढ़ाई में अच्छा था। चंडीगढ़ जाने के बाद उसकी जिंदगी बदल गई। लॉरेंस ईमानदार लड़का था और अच्छी पढ़ाई कर रहा था। चंडीगढ़ गया और वहां किसी गलत संगत में पड़ गया। इसके बाद उसकी जिंदगी बदलती चली गई। आखिरी बार करीब 10-12 साल पहले देखा
दुतारांवाली गांव में रहने वाले शालू के मुताबिक, हमने लॉरेंस को करीब 10-12 साल पहले आखिरी बार देखा था। उस समय लॉरेंस क्रिकेट खेलने के लिए ग्राउंड की तरफ जा रहा था। मंदिर के पास मुलाकात हुई तो लॉरेंस से हाथ भी मिलाया था। इसके बाद वह गांव नहीं आया। बच्चे ग्राउंड में खेलते मिले, लेकिन लॉरेंस पर बात नहीं की
गांव के ग्राउंड में बच्चे खेलते मिले। टीम ने उनसे लॉरेंस के बारे में बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कैमरे पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया। उन्होंने ऐसा क्यों किया, इसकी वजह उन्होंने नहीं बताई। चंडीगढ़ से साबरमती जेल तक: लॉरेंस की कहानी —————— ये खबर भी पढ़ें… लॉरेंस के भाई बोले- गैंगस्टर इमेज से फैमिली परेशान:सलमान खान ने माफी को मुद्दा बनाया; डाकू-आतंकियों जैसे सुधरने का मौका मिले सलमान खान मुकाम धाम आकर माफी मांग ले तो बिश्नोई समाज और लॉरेंस उसे माफ कर देंगे,लेकिन न जाने उसके दिमाग में क्या बैठा है, माफी को इश्यू बना दिया, काले हिरण के शिकार केस में फंसे बॉलीवुड एक्टर के लिए ये कहना है लॉरेंस के चचेरे भाई रमेश बिश्नोई का। अमेरिकी जांच एजेंसी FBI इन्वेस्टिगेशन के लिए लॉरेंस को अमेरिका ले जाने की बात कह चुकी है। इसको लेकर लॉरेंस के पारिवारिक सदस्य ने दैनिक भास्कर से एक्सक्लूसिव बातचीत की। रमेश बिश्नोई ने कहा कि लॉरेंस हाई सिक्योरिटी जेल में बंद है तो वहां से नेटवर्क कैसे चला रहा, अमेरिकी जांच एजेंसी का दावा हिंदुस्तान के खिलाफ साजिश है (पढ़ें पूरी खबर)

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