मानसून के आगमन को देखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा है कि प्राकृतिक जल निकासी मार्गों, तालाबों, नालों और जलाशयों पर किए गए अतिक्रमणों को तत्काल हटाया जाए ताकि बारिश के दौरान जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याओं से बचा जा सके
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि राजस्थान जैसे राज्य में प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। यदि नालों और जल निकासी मार्गों पर कब्जा बना रहेगा तो बारिश का पानी सही तरीके से नहीं निकल पाएगा, जिससे शहरों और गांवों में जलभराव की समस्या गंभीर हो सकती है।
अदालत ने सभी जिला प्रशासन, नगर निगमों और संबंधित विभागों को संयुक्त अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अधिकारियों से यह भी कहा गया कि भविष्य में दोबारा ऐसे अतिक्रमण न होने पाए, इसके लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था बनाई जाए।
इधर मौसम विभाग ने भी राजस्थान के कई हिस्सों में आगामी दिनों में तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की संभावना जताई है। पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में भारी वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया गया है। ऐसे में अदालत के निर्देश और भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
वरण विशेषज्ञों ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यदि प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था को सुरक्षित रखा जाए तो भूजल स्तर में सुधार होगा और शहरी बाढ़ की घटनाओं में भी कमी आएगी।
राज्य सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि निर्देशों का पालन प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। जिला प्रशासन को अभियान तेज करने और नियमित रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
स्थानीय नागरिकों ने भी प्रशासन से मांग की है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से की जाए ताकि मानसून के दौरान लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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