अमेरिका में H-1B वीजा के नियम सख्त हो सकते हैं:विश्वविद्यालयों की छूट सीमित हो सकती है; ग्रीन कार्ड से जुड़े नए नियम आना संभव

अमेरिका का ट्रम्प प्रशासन नए इमिग्रेशन नियमों की तैयारी कर रहा है, जिससे एच-1बी वीजा, रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड और छात्र वीसा की प्रक्रिया पहले से अधिक सख्त हो सकती है। प्रस्तावित बदलाव लागू होने पर भारतीय पेशेवरों, छात्रों और अमेरिकी कंपनियों के लिए नियमों का पालन करना अधिक कठिन और महंगा हो सकता है। ये प्रस्ताव अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग, श्रम विभाग और विदेश विभाग के एकीकृत रेगुलेटरी एजेंडा में शामिल हैं। इसके लिए अगस्त में बदलाव का प्रस्ताव आ सकता है। अगस्त में आ सकता है प्रस्ताव एच-1बी: विश्वविद्यालयों और कुछ शोध संस्थानों को मिलने वाली एच-1बी कैप छूट सीमित की जा सकती है। कई ऐसे प्रस्ताव हैं जिनसे कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। ग्रीन कार्ड: एच-1बी व ग्रीन कार्ड के लिए लागू न्यूनतम वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव है। साथ ही भर्ती नियमों, अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी से जुड़े प्रावधानों और भेदभाव-रोधी उपायों में बदलाव प्रस्तावित हैं। छात्र वीसा: प्रस्ताव के तहत विदेशी छात्रों के लिए मौजूदा ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ व्यवस्था खत्म कर निश्चित अवधि का प्रवास तय किया जा सकता है। जयशंकर ने भी उठाया था मुद्दा विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इसी साल मई में यह मामला अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के सामने उठाया था। रूबियो ने माना था कि नए इमिग्रेशन सिस्टम में बदलाव के दौरान कुछ दिक्कतें और तनाव हो सकते हैं। हालांकि, रूबियो ने कहा था कि अमेरिका इमिग्रेशन सिस्टम को ज्यादा प्रभावी बनाने की कोशिश कर रहा है और लंबे समय में इसका फायदा सभी पक्षों को मिलेगा। रूबियो ने यह भी कहा था कि यह कदम खासतौर पर भारत को निशाना बनाकर नहीं उठाया गया। उनके मुताबिक अमेरिका पिछले कुछ सालों में बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासियों की समस्या से जूझ रहा है। 2 करोड़ से ज्यादा लोग गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में दाखिल हुए और उसी चुनौती से निपटने के लिए यह बदलाव किए जा रहे हैं। —————————————– ये खबर भी पढ़ें… H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर वसूलने का आदेश रद्द:कोर्ट बोला- ट्रम्प फीस के नाम पर टैक्स नहीं ले सकते; भारतीयों को सबसे ज्यादा राहत अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने 9 जून को ट्रम्प के H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर (करीब 95 लाख रुपए) फीस वसूलने वाली नीति को रद्द कर दिया था। बॉस्टन कोर्ट ने कहा कि यह फीस नहीं बल्कि एक टैक्स है और इसे लागू करने के लिए राष्ट्रपति नहीं, बल्कि संसद की मंजूरी जरूरी थी। पूरी खबर पढ़ें…

  • Related Posts

    आज का एक्सप्लेनर:क्या वाकई 9/11 जैसी घटना होना तय था; उन 72 मिनटों की कहानी, खून से लथपथ कैप्टन स्मित ने कैसे बचाया

    30 सितंबर 2026, सुबह 9 बजकर 21 मिनट। सऊदी अरब के आसमान में अचानक एक प्लेन मुंह के बल नीचे गिरने लगा। कुछ मिनट के भीतर 34 हजार फीट की ऊंचाई से 17 हजार फीट…

    विमान हाईजैक होता तो मार गिराता इजराइल:9/11 जैसा हमला रोकने के लिए फाइटर जेट्स भेजे, हमलावर से बातचीत की तैयारी भी थी

    इजराइल ने दुबई से उड़ान भरने वाले उस विमान को मार गिराने की तैयारी कर ली थी, जिसके हाईजैक का अलर्ट भेजा गया था। बुधवार को अलर्ट मिलते ही फाइटर जेट्स रवाना कर दिए गए…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    आज का एक्सप्लेनर:क्या वाकई 9/11 जैसी घटना होना तय था; उन 72 मिनटों की कहानी, खून से लथपथ कैप्टन स्मित ने कैसे बचाया

    विमान हाईजैक होता तो मार गिराता इजराइल:9/11 जैसा हमला रोकने के लिए फाइटर जेट्स भेजे, हमलावर से बातचीत की तैयारी भी थी

    ट्रम्प बोले- फ्लाईदुबई को-पायलट का ईरान कनेक्शन हो सकता है:ऐसा हुआ तो कड़ी कार्रवाई होगी; UAE को सौंपा गया भारतीय पायलट पर हमले का आरोपी

    विमान अपहरण की कोशिश करने वाला पायलट कट्टरपंथी था:साथी बोला- महिलाओं से हाथ नहीं मिलाता था; यात्रियों ने पकड़ा तो चिल्लाया- मुझे मार दो

    उदयपुर-सूरत वंदे भारत 3 अक्टूबर से नियमित चलेगी:लेकसिटी में होगा 2 अक्टूबर को होगा स्वागत; जानें ट्रेन का पूरा शेड्यूल

    अमेरिका-मौत के 2 इंजेक्शन देने के बाद भी महिला बची:धड़कन चल रही थी, नींद में खर्राटे लेती रही; मौत की सजा टली