जोधपुर में 3,000 देशी पौधों से आकार ले रहा मियावाकी वन

जेनपैक्ट और प्लांट बाय कॉन्ट्री की पहल, कैमल कंजर्वेशन ट्रस्ट परिसर में सघन वन विकास कार्यक्रम

जोधपुर। पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में जोधपुर में महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। कैमल कंजर्वेशन ट्रस्ट परिसर में जेनपैक्ट की कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) पहल के तहत प्लांट बाय कॉन्ट्री द्वारा मियावाकी पद्धति से सघन वन विकसित करने के लिए वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान राजस्थान की जलवायु और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल करीब 3,000 देशी पौधे लगाए गए।

इस परियोजना के तहत लगभग 40 विभिन्न देशी प्रजातियों का चयन किया गया है। मियावाकी पद्धति में कम क्षेत्रफल में अधिक संख्या में पौधों का सघन रोपण किया जाता है, जिससे अपेक्षाकृत कम समय में घना और जैव विविधता से भरपूर वन विकसित किया जा सके।

जेनपैक्ट की ओर से सुश्री श्रद्धा ने कहा कि मियावाकी वन जैसी पहलें सीमित भूमि में हरित क्षेत्र विकसित करने के साथ-साथ स्थानीय जैव विविधता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए कॉर्पोरेट संस्थानों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की भागीदारी जरूरी है।

वहीं, प्लांट बाय कॉन्ट्री के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रोहित अग्रवाल ने बताया कि पौधों की प्रजातियों का चयन राजस्थान की जलवायु और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया है। उन्होंने कहा कि मियावाकी तकनीक से विकसित वन कार्बन अवशोषण, तापमान नियंत्रण और वायु गुणवत्ता सुधारने के साथ पक्षियों तथा अन्य जीव-जंतुओं के लिए प्राकृतिक आवास तैयार करने में भी सहायक होते हैं।

कार्यक्रम में जेनपैक्ट की नित्या सहित अन्य स्वयंसेवकों और प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया तथा करीब 3,000 पौधों का रोपण किया। इस दौरान पौधों के संरक्षण, नियमित देखभाल और उनके समुचित विकास को लेकर भी प्रतिबद्धता जताई गई।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को केवल पौधारोपण अभियान तक सीमित न रखकर पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण पर भी ध्यान देना जरूरी है। इस परियोजना का उद्देश्य स्थानीय जैव विविधता को संरक्षित करते हुए एक स्थायी और आत्मनिर्भर हरित क्षेत्र विकसित करना है।

कैमल कंजर्वेशन ट्रस्ट परिसर में विकसित हो रहा यह मियावाकी वन आने वाले वर्षों में जोधपुर के हरित आवरण को बढ़ाने और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह पहल CSR, सामुदायिक सहभागिता और प्रकृति संरक्षण के समन्वय का एक प्रभावी उदाहरण भी बन रही है।

कार्यक्रम में प्लांट बाय कॉन्ट्री की ओर से यूरी मिश्रा, हेमंत, नरेंद्र, चाहत, प्रियंका और दीपेंद्र सहित अन्य प्रतिनिधि एवं स्वयंसेवक मौजूद रहे।

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